दिल में हैं अरमाँ बहुत (ग़ज़ल)

दिल में हैं अरमाँ बहुत पर मुख़्तसर है ज़िन्दगी
वक़्त थोड़ा है मगर लम्बा सफ़र है ज़िन्दगी
दूर तक दिखता है मुझको सिर्फ़ काला सा धुआँ
आग अंदर फैलती सोज़े-जिगर है ज़िन्दगी
आपको धोखा हुआ है मिल गयी मंज़िल मुझे
बस भटकती ही रही यूँ दर-ब-दर है ज़िन्दगी
इश्क़ ने बदली है दुनिया तू बदल जाए तो क्या
साथ अब तो राहगीरो-रहगुज़र है ज़िन्दगी
उम्र भर तन्हाईयों में ढूंढता था मैं जिसे
मिल गया वो जो चराग़े-रहगुज़र है ज़िन्दगी
क़त्ल तू करता रहा है मुस्कुराकर ही 'अमर'
फिर भी हम कहते हैं तू ही हमसफ़र है ज़िन्दगी

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