उपेक्षितों का काव्यान्दोलन - पंकज गोष्ठी: पूर्वपीठिका और महत्व
उपेक्षितों का काव्यान्दोलन - पंकज गोष्ठी: पूर्वपीठिका और महत्व डॉ. बिक्रम सिंह असोसिएट प्रोफेसर , हिन्दी विभाग देशबंधु महाविद्यालय , दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली भूमिका : पुराने संताल परगना के तीनों प्रमुख स्थान - देवघर , दुमका तथा राजमहल की गणना दुर्गम , पिछड़े तथा उपेक्षित कस्बों के रूप में होती रही है। बृहत्तर रूप से यह क्षेत्र भागलपुर डिविजन का विस्तार है। इतिहास में यह दर्ज है कि अंग्रेज क्लेवलैंड ( 1755-1785) ने राजमहल पहाड़ी की आदिम जनजातियों का दमन किया था और स्वयं उसकी कब्र भी इसी इलाके में है। 1 प्राचीन भारत में यह भागलपुर ही अंग देश के नाम से जाना जाता था। वायु पुराण तथा ब्रह्माण्ड पुराण में इसका एक और नाम मिलता है- चंपा अथवा चंपावती। 2 यहाँ नागों तथा गुप्तों ने शासन किया था। इस प्रदेश की जनसंख्या अत्यंत विरल थी। सम्भवतः इसी कारण समुद्रगुप्त को भी इस पर अधिकार प्राप्त करने में बहुत कम समय लगा था। समुद्रगुप्त ने मगध , उड़ीसा , छत्तीसगढ़ और बंगाल को जीतकर जिस प्रान्त की सृष्टि की थी उसकी राजधानी चंपा ही थी। 3 आधुनिक बिहार जिन तीन प्राचीन राज्यों का संयुक्त रूप है ...