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जुलाई, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेरी ताज़ी झारखण्ड यात्रा

I AM REALLY PROUD OF MY PROFESSION WHICH HAS BEEN GIVING ME ENORMOUS OPPORTUNITIES TO SERVE THE HUMANITY.WAY BACK IN 1986,WHEN I HAD BECOME A LECTURER I WAS SO HAPPY THAT I STARTED FEELING AT THE TOP OF THE WORLD.MY FRIENDS WHO WERE PREPARING FOR CIVIL SERVICES WERE NOT ABLE TO COMPREHEND WHEN THEY FOUND THAT I WAS CONSIDERING TEACHING IN A COLLEGE OF DELHI UNIVERSITY MUCH MORE WORTH THAN ANY THING ELSE.MAY BE I WAS FASCINATED TO THIS PROFESSION BECAUSE I HAD SEEN THE PRESTIGE AND SHRADDHA ENJOYED BY MY FATHER , A GREAT TEACHER TOO ,SINCE MY CHILDHOOD. TODAY AFTER BECOMING AN ASSOCIATE PROFESSOR AND ASPIRING TO BECOME A PROFESSOR (IF THE PROFESSORSHIP IS INTRODUCED IN THE COLLEGES OF DELHI UNIVERSITY) I FEEL MUCH MORE PROUD AND CONTENTED SINCE THIS PROFESSION HAS BEEN GIVING ME CREATIVE SATISFACTION IN THE REAL SENSE . BUT MORE THAN A TEACHER I STILL FEEL LIKE A STUDENT , AS FROM THE VERY BEGINNING OF MY STUDENT DAYS ,I HAVE BEEN CURIOUS TO KNOW MORE ABOUT THE PLACES I VISIT.MAY BE...

www.pankajgoshthi.org/ launched and started---a web-site dedicated to santal-pragnas of jharkhand.

३० जून २००९ को दुमका में हुए दो समारोह काफी चर्चित रहे.पहला समारोह या कहें समारोहों की श्रृंखला तो प्रत्येक वर्ष हल-क्रांति दिवस के रूप में आयोजित की जाती है,परन्तु दूसरा समारोह इस मायने में महत्त्वपूर्ण रहा कि यह आचार्य ज्योतींद्र प्रसाद झा 'पंकज' की ९०वी जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था.आचार्य ज्योतींद्र प्रसाद झा 'पंकज' ९०वी जयंती समारोह समिति तथा पंकज-गोष्ठी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह समारोह काफी चर्चित रहा तथा मिडिया ने भी इसे काफी प्रमुखता दी.३० जून के प्रभात-खबर ने "आचार्य ज्योतींद्र प्रसाद झा 'पंकज' की ९०वी जयंती आज " शीर्षक से बड़ा समाचार तो छापा ही,अलग से एक बड़ा लेख भी प्रकाशित किया जिसका शीर्षक था "स्वयं में एक संस्थागत स्वरुप थे कविवर पंकज जी".लेखक ने इस लेख में पंकज जी के कई पहलुओं को उद्घाटित करते हुए समारोह की सफलता की नींव दाल दी. समारोह की शुरुवात होने में एक घोषित समय से एक घंटे का विलंब हुआ क्योंकि २८-२९जुने को मुसलाधार वारिस तो हुई ही थी,३० की सुबह से ही घनघोर वर्षा हो रही थी.मनो भय...