सोमवार, 16 मार्च 2009

rajneeti

राजनीती में हूँ और राजनीती के सारे प्रपंचों को समझता भी हूँ.क्या सचमुच राजनीती ऐसी ही होती है.क्या सब दिन राजनीती ऐसी ही थी.क्या राजनीती ऐसी ही रहेगी.२००२ में भी चुनाव लड़ सकता था अगर वह शर्त पूरी करता.२००४ में तेल और तेल की धार देखता रह गया मैं सांसद बन गया कोई और.अब२००९ में क्या नया है देखना चाहता हूँ.इसीलिए तो इसबार ज्यादा व्यापक स्तर पर क्रियाशील हो गया हूँ.परन्तु आज क्या हुआ सुनो.टिकट की कीमत देनी होगी.कितनी कीमत बस अंदाजा लगाओ.मेकियावेल्ली और chaanakya के साथ महाभारत भी पदों तभी समझ सकोगे इस खेल को.

1 टिप्पणी:

  1. you can't say about this even if you read about chaankya because even chaankya had not thought that some day politics will be so selfcentered.

    brijender dahiya

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