शिवोहम् शिवोहम् । हर-हर महादेव।शिव-शक्ति के मिलन का मुहुर्त।शक्ति में शिवत्व का और शिव में शक्ति के अधिष्ठान का मुहुर्त।संयोग कि विगत दो दशकों से अपने यहाँ भी धूम मचाए हुए 'वैलेंटाइन्स डे' भी इस साल आज ही के दिन है।प्रेम, मांसल प्रेम, का प्रतीक बन चुके इस 'दिवस' का इस बार आज के दिन आना, इसे 'प्रेम-दिवस' कहलाने का हकदार भी बना रहा है। प्रेम के पंथ से गुजरते हुए; देह की गली से चलकर आत्मा तक की यात्रा संपन्न करते हुए, भी कोई 'शिवोहम्' की अनुभूति के धरातल पर पहुँच सकता है। हाँ, प्रेम की उत्कटता, दीवानगी या बावलापन इसकी पूर्व शर्त है।'कुमारसंभवम्' बहुत प्रासंगिक है, आज भी।'सहजिया संप्रदाय' में भी इस उत्कटता को ही शिवत्व (मोक्ष) की प्राप्ति का मार्ग माना गया था।

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