फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ा
तेरी आहट सुन के ही
----------------------------
अमर पंकज
(डॉ अमर नाथ झा)
दिल्ली विश्वविद्यालय
मोबाइल-9871603621
तेरी आहात सुन के ही मौसम का आज बदल जाना
परियों से मंगाकर खुशबू कलियों का भी मुसकाना।
भूली सारी बातें कल की फिर आँखें आज लड़ाना
नज्में मेरी सुनकर अब उनकी नज़रों का झुक जाना।
हँसती सी पलकों से हरदम हँस-हँस के ही जतलाना
ख्वाबों में ही सिर्फ नहीं ना तुम कोई अब अफसाना।
करके बंद गिला देखो फिर बदला है आज जमाना
आओ बिसरें कल की बातें चल गाएँ आज तराना।
पाती दिल की पढ़कर सिलवट मत पेशानी पे लाना
सीने के जख्मों को सीकर तुम यूँ ही फ़िर मुसकाना।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नये भारत की परिकल्पना: आचार्य ज्योतीन्द्र प्रसाद झा 'पंकज' की कविताओं का गहन अध्ययन

ग़ज़ल बे-बहर (नज़्म ही मेरी आवाज़ है )