बहरे-मुतदारिक मसम्मन सालिम:
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन
(212 212 212 212 )
ना दिशा ना किनारा
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अमर पंकज
(डॉ अमर नाथ झा)
दिल्ली विश्वविद्यालय
मोबाइल-9871603621
ना दिशा ना किनारा, बही जिंदगी
ना फ़जा ना फ़साना, यही जिंदगी।
आबरू की फ़िकर थी, आज भी बहुत
इसलिए बेख़बर भी, लही जिंदगी।
फिर चली मौसमी है, यहाँ भी हवा
दर्द सब सह सके जो, वही जिंदगी।
देख पाए नहीँ हम नज़र भर जिन्हेँ
बात उनकी सुनी अनकही जिंदगी।
बह रही हर बरस बस, पुरानी हवा
गंध बासी मग़र हँस, रही जिंदगी।
खेल सब जानते हैं, गज़ब ये ‘अमर’
जीतकर हार में जी, रही जिंदगी।

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