यादों में तुम जब आते हो
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अमर पंकज
(डॉ अमर नाथ झा)
दिल्ली विश्वविद्यालय
मोबाइल-9871603621
यादों में तुम जब आते हो
कुछ सौगातें भी लाते हो।
भूली-बिसरी सुधियाँ छेड़ी
घाव हरे सब कर जाते हो।
ऐसा तो सौ बार हुआ है
बीच डगर क्यों भरमाते हो।
नैनों के कोरों से छलके
धीरे से जब मुस्काते हो।
ढलता यौवन भी लहराता
मुझको अब भी ललचाते हो।
बीते जीवन के पल कितने
अब भी 'अमर' तुम सकुचातो हो।

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