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हर ठौर नहीं दिल अब मिलता
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अमर पंकज
(डॉ अमर नाथ झा)
दिल्ली विश्वविद्यालय
मोबाइल-9871603621
हर ठौर नहीं अब दिल मिलता
जों फूल नहीं हर पल खिलता।
वो दौर बना फिर से सपना
तुमसे दिल मिलकर जब खिलता।
अपनी दुनिया बदली जबसे
कोई भी नहीं तुम सा मिलता।
सारी दुनिया भटका लेकिन
वो प्यार पुराना नहीं मिलता।
कोशिश कर लो तुम भी पर अब
यह ज़िस्म नहीं पल भर हिलता।
धड़कन चलती तब तक जब तक
है जख़्म 'अमर' तुमसे सिलता।

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