डर के डराने का हुनर
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डर के डराने का हुनर सीखा कहाँ
हँस के रुलाने का हुनर सीखा कहाँ
रोते हुए हँसने अचानक वो लगे
रो कर हँसाने का हुनर सीखा कहाँ
बिछते रहे हैं लोग राहों में तेरे
पागल बनाने का हुनर सीखा कहाँ
झूठे तेरे वादे मगर सच क्यों लगे
सच को छिपाने का हुनर सीखा कहाँ
बदले हुए दिखते सभी चहरे यहाँ
दिल यूँ दुखाने का हुनर सीखा कहाँ
कैसे बजाते हो बाँसुरी चैन की
दुनिया भुलाने का हुनर सीखा कहाँ
महबूब की बातें अनूठी हैं 'अमर'
जी भर सताने का हुनर सीखा कहाँ
:अमर पंकज
(डाॅ अमरनाथ झा)
दिल्ली विश्वविद्यालय
मोबाइल--9871603621

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