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'अभी-अभी' के आफिस से न्यूज एडिटर को पुलिस ने उठाया

मालिक और समूह संपादक भूमिगत : चरखी दादरी में पत्रकार उतरे सड़क पर, निकाला मौन जुलूस : प्रेस क्लब नारनौल ने की पुलिस कार्रवाई की निंदा : 'अभी-अभी' अखबार के रोहतक मुख्यालय से हरियाणा पुलिस ने न्यूज एडिटर उदयशंकर खवारे को गिरफ्तार कर लिया है। अखबार के मालिक और प्रधान संपादक कुलदीप श्योराण और ग्रुप एडिटर अजयदीप लाठर भूमिगत हो गए हैं। ये लोग अपनी अग्रिम जमानत कराने की कोशिश में हैं। सभी के मोबाइल स्विच आफ आ रहे हैं। 'अभी-अभी' से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि हरियाणा पुलिस एकेडमी के खिलाफ खबर छापे जाने से नाराज पुलिस अधिकारी अखबार की प्रिंटिंग रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हिसार में प्रिंटिंग रोकी गई जिससे अखबार की प्रिंटिंग बाहर से कराई गई। अभी-अभी की सेकेंड लाइन को भी परेशान कर रही है पुलिस ताकि अखबार का प्रकाशन और संचालन अधिकतम बाधित की जा सके। अभी-अभी का मुख्यालय पहले गुड़गांव हुआ करता था जिसे बाद में रोहतक शिफ्ट कर दिया गया। रोहतक, हिसार और नोएडा से प्रकाशित होने वाले इस अखबार को रोहतक के मधुबन स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी के खिलाफ खबर छापना भारी पड़ रहा है। हालांकि हरियाणा क...
कल पुनः बेचैन जी को सुनाने का मौका मिला.एक सुखद एहसा है उनको सुनना.दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन की ओर से हिंदी भवन में --एक शाम कुंवर बेचैन के नाम ---कार्यक्रम में उनके एकल काव्य पाठ में हम डूबते चले गए.डॉ.व्यास ने ठीक ही कहा की पिछले पांच दशक की गुटबंदी के दौर में बिना किसी गुट का होते हुए भी खुद को साहित्य में प्रासंगिक बनाये रखना उनकी सबसे बड़ी सफलता है.परन्तु मेरी नजर में उनके काव्य संसार में अभिव्यक्त वदना और प्रेम के स्वर ने ही उनको प्रासंगिक बनाये रखा.उनके पूर्ववर्ती के रूप में पंकज के काव्य में भी जिजीविषा ,संघर्ष और प्रेम के भाव को ही प्रमुखता मिली है.पंकज और बेचैन की कविताओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है.------

खुशबू की लकीर ही है----डॉ.कुंअर बेचैन की काव्य-यात्रा

खुशबू की लकीर ही है----डॉ.कुंअर बेचैन की काव्य-यात्रा. कल यानी १ दिसंबर ०९ को राजभाषा मंच की ओर से आयोजित साहित्य अकादमी के कर्यक्रम---कुंअर बेचैन के एकल काव्य -पाठ में शामिल होना एक सुखद -अनुभूति की तरह था.सचमुच बेहद सुरीली आवाज के मालिक कुंअर बेचैन को माँ सरस्वती ने अपनी कृपा से समृद्ध किया है.लगभग दो घंटे के इस कर्यक्रम में --------
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पंकज जी समाज का वरदान! ये कहा जाता है कि bhagvaan कभी कभी मानव को महामानव बनाकर दुनिया में भेजते हैं।is बात को बल आचार्य ज्योतिन्द्र प्राद झा "पंकज" के जन्म पर मिलता है और ऊपर वाले की सत्ता की इन्साफ पर यकीं होता है। इस बात पर कोई किंतु परन्तु नहीं है की उपरवाले ने परमपूज्य "पंकज जी " को एक समाज का एक अनमोल वरदान स्वरुप तोहफा भएंट प्रदान किया। जारी

ye kaisi bachainee hai?

ये कैसा अनमनापन है? जोश-खरोश से  दुनिया को बदलने के सपने ३५ सालों से देख रहा हूँ.तरंग सी उठती है मन में,तूफ़ान सा उठाता है दिल में.और बढ़ जाता हूँ --कुछ कर देता हूँ.असंभव सा दीखने वाला काम मुझे ही नहीं मेरे साथियों को भी संभव दीखने लगता है.मेरे साथ सभी सपने देखने लगते हैं.पर सपने पूरे होते हैं क्या? तो फिर क्या हुआ?   

बहुत कुछ बदल गया .....पर कुछ भी तो नहीं बदला.

23 साल बीत गए. 24 साल शुरू हो गए. लगभग दो युग का अंत.  युगांत... आज ही के दिन 1986 में मैनें अपने कॉलेज में, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में व्याख्याता पद पर योगदान किया था. आज असोसिएट प्रोफेसर बन गया हूँ, परन्तु खुद को वहीं खडा पाता हूँ. बल्कि  तब बहुत अधिक जोश और उत्साह से लबरेज था मैं. जोश तो अब भी वही है, परन्तु कई बार उत्साह नही होता....परन्तु दुनिया को बदलने की तमन्ना अभी भी शेष है...वैसी की वैसी,एक दिवा स्वप्न की तरह . बहुत कुछ बदल गया .....पर  कुछ भी तो  नहीं बदला. बाल सफ़ेद हो गए . पत्नी गंभीर हो गयीं. बेटा 18 साल का हो गया. बेटी 12 साल की हो गयी..13 पूरे हो जायेंगे उसके भी जनवरी में.........